केरल के सबरीमाला मंदिर में पुरुषों की तरह महिलाओं को भी प्रवेश करने और प्रार्थना करने का संवैधानिक अधिकार है। बुधवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा कि अगर पुरुष सबरीमाला मंदिर में अंदर जा सकते हैं तो महिलाएं भी वहां जा सकती हैं।
संविधान पीठ 10 से 50 साल उम्र की महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश पर पाबंदी के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस मामले में सुनवाई पूरी नहीं हुई और बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी।
अदालत ने कहा कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के बारे में कोई कानून नहीं होने के बावजूद इस मामले में उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है। मंदिर में प्रवेश के अधिकार के लिए किसी कानून की जरूरत नहीं है। यह कानून पर निर्भर नहीं है। यह संवैधानिक अधिकार है।


